सजन रे झूठ मत बोलो, खुदा के पास जाना है
न हाथी है न घोड़ा है, वहाँ पैदल ही जाना है
तुम्हारे महल चौबारे, यहीं रह जायेंगे सारे
अकड़ किस बात की प्यारे, ये सर फिर भी झुकाना है
सजन रे झूठ...
भला कीजे भला होगा, बुरा कीजे बुरा होगा
बही लिख-लिख के क्या होगा, यहीं सब कुछ चुकाना है
सजन रे झूठ...
लड़कपन खेल में खोया, जवानी नींद भर सोया
बुढ़ापा देखकर रोया, वही किस्सा पुराना है
सजन रे झूठ...